92 जिनवाणी से गुंजायमान हुई बारडोली


कटनी. मानव को जीवन में जप, तप और जिनवाणी के लिए समय निकालना चाहिए। इसका महत्व समझना चाहिए। संतों व गुरूजनों की कृपा के कारण ही मानव को प्रभु भक्ति के लिए जप व तप करने का अवसर मिलता है। मानव को जिनवाणी का श्रवण करना जरूरी है। जिनवाणी ऐसा ज्ञान है जिसे जितना मिले ग्रहण करना चाहिए। तीर्थंकरों की अमृतवाणी का सार इसमें समाया है। जैन धर्म के 45 आगम में पूरे संसार का सार समाया है। तप और आराधना से मानव की पुण्य कर्मों का संचय होता है। इसी भावना को लेकर शहर में भव्य जुलूस निकाला गया। दिगम्बर जैन समाज व सकल जैन समाज द्वारा श्रुत पंचमी का भव्य जुलूस निकाला गया। जुलूस नगर भ्रमण करता हुआ बच्चों के शिक्षण शिविर पर धर्म प्रभावना के लिए जिनवाणी मां का नगर भ्रमण कराया गया। इस दौरान बारडोली की धरा पर जिनवाड़ी के स्वर गूंजेइन मार्गों से निकली शोभायात्रा झंडा बाजार स्थित जैन बड़े मंदिर से प्रारंभ होकर जवाहर चौक, कपड़ा बाजार, सुभाष चौक, साधूराम हाइस्कूल के सामने से होते हुए वापस बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा के रूप में परिवर्तित हो गई। यहां पर भक्तिभाव से आरती, भजन, पूजन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान प्रमोद जैन, रमेश चंद, कोमलचंद जैन, मल्लू जैन, समीर जैन, मग जैन, अनिल कटारे, मुकेश जैन, मंजू जैन, सुकमाल जैन, मनीष जैन सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।बच्चों ने दी प्रस्तुति जुलूस में श्री 1008 शांतिसागर रात्रिकालीन पाठशाला के बाल-बालिकाएं भजन गाते चल रहे थे। सभी श्वेत वस्त्र में थे। सुंदर और श्वेत वेशभूषा में बच्चे आकर्षण का केंद्र रहे। किसी के सिर पर मुकुट, तो किसी के सिर पर जिनवाणी सहित अन्य ग्रंथ शोभायमान थी। भजनों की सुमधुर प्रस्तुति के बीच समाज के महिला-पुरुष व बच्चे एकदम भाव में दिखे। सहित ने श्रुत पंचमी पर विशेष श्रद्धा भाव के साथ पूजन किया।

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