7 जैविक खेती पर 5 दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला में स्वीटजरलैण्ड के विशेषज्ञ जैविक खेती तकनीकों में उद्बोधन देगें



   
                                                       बालाघाट  आदिवासी बाहुल्य बालाघाट जिले में पहली बार जैविक खेती के प्रचार, प्रसार एवं परिमार्जन हेतु राष्ट्रीय ऑनलाइन कार्यशाला कृषि महाविद्यालय, बालाघाट आयोजित करने जा रहा है। ऑनलाइन कार्यशाला के विषय में महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ.जी.के.कौतू ने बताया कि इस पाँच दिवसीय जैविक खेती कार्यशाला में देश-प्रदेश स्तर पर जैविक खेती के क्षेत्र में अपना योगदान देने वाले कृषक, उत्पादक समूह, कृषि छात्र, वैज्ञानिक भारत सरकार एवं राज्य शासन के शासकीय वर्ग की सक्रिय सहभागिता रहेगी।

     इस ऑनलाइन कार्यशाला में अन्तरराष्ट्रीय संस्था फीविल स्वीटजरलैण्ड के विशेषज्ञ जैविक खेती के विकास व अपनाने की सामरिक योजना के विषय में अपने अनुभव व अनुकरणीय तकनीकों के सम्बन्ध में उद्बोधन देगें। ज्ञात हो कि ज.ने.कृ.वि.वि. के कुलपति प्रो. प्रदीप कुमार बिसेन की विशेष अभिरूचि व मार्गदर्शन में इस ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। यह ऑनलाइन कार्यशाला प्रदेश व देश के कृषकों, उत्पादकों को जैविक खेती अपनाने इसके पंजीयन तथा विपणन सम्बन्धी समस्याओं के समाधान में सहायक व मार्गदर्शक सिद्ध होगी। हालाकि मध्यप्रदेश जैविक पंजीयन के रकबे में अग्रणी हैं। अतः इस क्रम में यह प्रयास होगा कि मध्यप्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर उत्पादन व विपणन में भी अग्रणी हो सके। इस ऑनलाइन कार्यशाला में राष्ट्रीय स्तर के ख्यातिलब्ध 12 वैज्ञानिक/विशेषज्ञों द्वारा कृषकों/उत्पादक समूह, विपणन सम्बन्धी संस्थाओं को एक प्लेटफार्म पर लाकर (ऑनलाइन) परिसम्वाद किया जायेगा।

     इस ऑनलाइन कार्यशाला के समन्वयक डॉ.एस.बी.अग्रवाल व सचिव डॉ.शरद बिसेन का कहना है कि जैविक खेती अपनाने एवं इसके विकास से एक ओर हमारे कृषक आत्मनिर्भर हो सकेंगे वहीं ग्रामीण बेरोजगार युवा, कृषि छात्र स्व रोजगार अर्जित करने में सक्षम होंगे। जैविक खेती, समस्त जीवधारियों, पर्यावरण भूमि, जल, वायु व वातावरण को शुद्ध व सुगम बनाने में अपनी अहम भूमिका निभाती है।


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