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आखिरकार जिस बात का अनुमान लगाया जा रहा था वही हुआ, उपराष्ट्रपति का पद भी बीजेपी के नाम हुआ। अब तीनों सर्वोच्च पद राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री पर बीजेपी काबिज है। उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का आखिरी दिन 10 अगस्त है जिसके बाद वैंकेया नायडू उपराष्ट्रपति पद ग्रहण करेंगे । इस चुनाव में जहां वैंकेया को 516 वोट मिले वहीं विपक्षी दलों के उम्मीदवार गोपालकृष्ण गांधी को 244 वोट प्राप्त हुए। उपराष्ट्रपति चुनाव जीतने पर वैंकेया नायडू को पीएम मोदी, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, अमित शाह, ममता बनर्जी, नीतीश कुमार समेत कई दिग्गज नेताओँ ने शुभकामनाएं दी। वैंकेया नायडू के उपराष्ट्रपति चुनाव जीतने से बीजेपी को काफी फायदा मिला है क्योंकि जहां राज्यसभा में बीजेपी के सांसदों की बढ़ोत्तरी हुई है, वहीं अब राज्यसभा का सभापति भी उन्हीं की पार्टी का होगा। ऐसे में उन्हें राजनीतिक फायदा मिल सकता है। देखा जाए तो वैंकेया नायडू को भी राज्यसभा का काफी ज्ञान है क्योंकि वो चार बार राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं। वैंकेया के उपराष्ट्रपति बनने से दक्षिण राज्यों में बीजेपी का जनाधार बढ़ेगा। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, वित्तमंत्री अरुण जेटली, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के बाद वेंकैया ही सबसे सीनियर मंत्री हैं। क्या है आपके उपराष्ट्रपति का इतिहास वैंकेया नायडू दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश से आते हैं। उनका जन्म आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में हुआ था। उन्होंने वी.आर हाईस्कूल, नेल्लोर से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और फिर वी.आर कॉलेज से राजनीति तथा राजनयिक अध्ययन में स्नातक किया। उन्होंने आंध्र विश्वविद्यालय से कानून में स्नातक की डिग्री हासिल की। राजनीतिक पहचान उन्हें 1972 में मिली जब उन्होंने ‘आंध्र आंदोलन’ में सक्रिय भूमिका अदा की। छात्र जीवन से ही वो राजनीतिक कार्यो में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते थे। उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण की विचारधारा से प्रभावित होकर आपातकाल के समय बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस दौरान वो कई बार जेल भी गए। नायडू 1977 से 1980 के बीच जनता पार्टी के समय यूथ विंग के प्रेसिडेंट भी रह चुके हैं। वेंकैया नायडू बीजेपी से चार बार राज्यसभा के सांसद रह चुके हैं। वह अटल बिहारी के सरकार के दौरान बीजेपी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उनके पास राज्यसभा का काफी अनुभव है जो कि बीजेपी की हर मोर्चे पर मदद कर सकता है। नायडू पहली बार राज्यसभा के लिए साल 1998 में चुने गए थे जिसके बाद वे साल 2004,2010 और 2016 में भी राज्यसभा के सांसद बने थे।

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