407 अब साधु-संतों के आंदोलन का ऐलान, मठों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करवाने के लिए कानून की मांग,किसानों की तरह डाल सकते हैं सड़कों पर डेरा:मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण -CRIME BHASKAR NEWS.COM-EDITOR UMESH SHUKLA


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नई दिल्ली 23.11.2021


नई दिल्ली| साधु-संतों का यह आंदोलन मंदिरों और मठों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करवाने के लिए कानून की मांग को लेकर है।  अखिल भारतीय संत समिति के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में मंच से साधु-संतों ने कहा कि जब किसान दिल्ली के रास्ते को रोककर बैठ सकते हैं और सरकार से अपनी मांगें मनवा सकते हैं तो हम साधु-संत ऐसा क्यों नहीं कर सकते। 
                               मीडिया  के मुताबिक, ज्यादातर साधु-संतों ने कहा कि अगर सरकार हमारी मांगें नहीं मानती हैं तो हम भी दिल्ली में डेरा डालेंगे। वहीं, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का जिक्र कर मठ-मंदिरों पर अवैध रूप से कब्जे को लेकर अपनी नाराजगी जताई।       

          महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि जनवरी 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में नटराज मंदिर को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने वाले आदेश में कहा था कि मंदिरों का संचालन और व्यवस्था भक्तों का काम है। सुप्रीम कोर्ट मंदिर के पुजारियों और बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की अपील पर यह फैसला सुनाया था। 

                जगन्नाथ मंदिर के अधिकार वाले केस में कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि मंदिरों पर भक्तों द्वारा चढ़ाए गए धन को सरकारें मनमाने तरीके से खर्च करती हैं। जबकि एक भी चर्च या मस्जिद पर राज्य का नियंत्रण नहीं है। कृषि कानूनों की वापसी से ट्रेड यूनियनों से लेकर साधु-संतों तक को अपनी मांगें मनवाने का मौका मिल गया है।कृषि कानूनों की वापसी के फैसले से प्रेरित होकर अब साधु-संतों ने भी आंदोलन का ऐलान किया है। दरअसल, देश के अलग-अलग हिस्सों से आए साधु-संतों ने दिल्ली के कालकाजी मंदिर में मठ-मंदिर मुक्ति आंदोलन की शुरुआत की।साधुओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर किसान सरकार को झुका सकते हैं तो हम क्यों नहीं। जरूरत पड़ी तो हम दिल्ली में डेरा डालेंगे। 

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