149 भारत-चीन के बीच तनाव की स्थिति पर वायुसेना हाई ऑपरेशनल अलर्ट चीन सीमा पर, एयरफोर्स चीफ ने किया लेह बेस का दौरा: जवानों की रिहाई के बाद बातचीत




 




दिल्ली19-06-2020,umesh shukla अपडेटेड 

गलवान की हिंसक झड़प के 3 दिन बाद 

चीन ने 2 मेजर समेत 10 जांबाजों को छोड़ा




नई दिल्ली, 19-06-2020, अपडेटेड umesh shukla


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  • भारत-चीन के बीच तनाव की स्थिति 
  • वायुसेना चीफ ने लेह बेस का दौरा

वायुसेना इस वक्त लेह-लद्दाख इलाके में अलर्ट पर है, ऐसे में इस दौरे की अहमियत काफी अधिक है.भारत और चीन के बीच इस वक्त तनाव की स्थिति बनी हुई है. किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए सेना से लेकर वायुसेना अलर्ट पर है. इस बीच बुधवार की देर रात को वायुसेना प्रमुख RKS भदौरिया ने लेह एयरबेस का दौरा किया. सूत्रों की मानें तो वायुसेना प्रमुख RKS भदौरिया बुधवार रात को श्रीनगर-लेह एयरबेस पर पहुंचे. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत और सेना प्रमुख एमएम नरवणे से मुलाकात करने के बाद ये दौरा शुरू हुआ था.चीन के साथ जारी विवाद में बॉर्डर के पास लेह और श्रीनगर एयरबेस काफी अहम हैं. ऐसे में वायुसेना प्रमुख ने यहां की तैयारी और जरूरतों का जायजा लिया.

10 जवानों की रिहाई के बाद बातचीत का रास्ता LAC पर हालात तनावपूर्ण, 

                                       चीन के साथ जारी विवाद के बीच अपाचे और चिनूक जैसे हेलिकॉप्टर को लद्दाख में तैनात किया गया है, इसी फ्लीट ने बालाकोट में एयर स्ट्राइक की थी. इससे पहले सुखोई-30 को भी अलर्ट पर रखा गया और ऊपर के एयरबेस पर तैनात किया गया है.बता दें कि वायुसेना ने मिराज 2000 की फ्लीट को भी लद्दाख क्षेत्र के पास मूव कर लिया है, ताकि चीन के पास बॉर्डर पर तुरंत मूव किया जा सके. ताकि जवानों को तुरंत मदद पहुंचाई जा सके. अपाचे हेलिकॉप्टर किसी भी मुश्किल परिस्थिति में काम में लाया जा सकता है.

लद्दाख सीमा पर गलवान घाटी में हुई खूनी झड़प में चीनी सेना ने भारतीय सेना के 10 जवानों को बंधक बना लिया था. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, चीनी ने दो मेजर समेत 10 भारतीय जवानों को बंधक बनाया था, जिन्हें तीन दिन की बातचीत के बाद रिहा करा लिया गया है. हालांकि, सेना की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया गया है.सेना ने गुरुवार को अपने बयान में कहा था कि इस कार्रवाई में कोई भारतीय सैनिक लापता नहीं है. हालांकि, सेना की ओर से यह बयान नहीं जारी किया गया है कि कोई जवान बंधक बनाया गया था या नहीं, लेकिन पीटीआई के मुताबिक, चीनी सेना ने दो मेजर समेत 10 जवानों को बंधक बनाया था, जिन्हें तीन दिन बाद रिहा करा लिया गया है.इससे पहले जुलाई, 1962 में चीनी सेना ने भारतीय सैनिकों को बंदी बनाया था. गलवान घाटी में युद्ध के दौरान करीब 30 भारतीय जवान शहीद हुए थे और दर्जनों जवानों को चीनी सेना ने पकड़ लिया था. जिन्हें बाद में रिहा कराया गया था.

गलवान घाटी झड़प में 76 जवान घायल

पीटीआई के मुताबिक, चीनी ने दो मेजर समेत 10 भारतीय जवानों को बंधक बनाया था, जिन्हें तीन दिन की बातचीत के बाद रिहा करा लिया गया है. हालांकि, सेना की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया गया है.

15 जून की रात को भारतीय सेना का एक दल गलवान घाटी के पेट्रोलिंग प्वाइंट-14 पर चीनी सेना से बात करने गया था.5 मई को भारत और चीनी की सेना पैंगोंग त्सो में उलझ गए थे. गतिरोध शुरू होने के बाद भारतीय सेना ने फैसला किया कि पैंगोंग त्सो, गलवान घाटी, डेमचोक और दौलत बेग ओल्डी के सभी विवादित क्षेत्रों से चीनी सैनिकों को पीछे धकलने के लिए सेना की ओर से कदम उठाए जाएंगे. इसके लिए दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई, जो बेनतीजा रहीसैन्य सूत्रों ने कहा कि चीनी सेना द्वारा सोमवार रात किए गए हमले में भारतीय सेना के 76 जवान घायल हो गए थे, जिसमें से 18 गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि 58 मामूली रूप से घायल हुए. लेह के एक अस्पताल में 18 जवानों का इलाज चल रहा है, जबकि 58 अन्य विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं.भारतीय और चीनी सेना के अधिकारियों के बीच गुरुवार को लगातार तीसरे दिन मेजर जनरल-स्तर की बातचीत हुई, जिसमें सैनिकों के बीच हुई खूनी झड़प के साथ-साथ गलवान घाटी के आसपास के क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल करने पर बातचीत हुई. भारत और चीन की सेना 5 मई से आमने-सामने हैं.. इस दौरान घात लगाकर बैठे चीनी सैनिकों ने भारतीय सेना के दल पर हमला कर दिया. इस खूनी झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद गए, जबकि चीन को भी भारी नुकसान हुआ था. 

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